महिला सशक्तिकरण की दिशा में लैंगिक समानता के मायने

 





 🖋सोनी त्रिपाठी 
ज के इस आधुनिक युग में हम एक तरफ तो महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं तो दूसरी तरफ लैंगिक समानता को उतना महत्व नहीं देते जितना हमारे समाज के लिए जरूरी है। महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए बहुत से कानून बनाए गए हैं। हालांकि कोई भी कानून उतना अधिक प्रभावशाली नहीं है। न ही लोग उनका पालन करते हैं।
देश में बहुत ही प्रभावशाली और कड़े नियम होने चाहिए ताकि सब लोग उसका पालन करें। महिला सशक्तिकरण केवल सरकार की ही जिम्मेदारी नहीं बनती। यह प्रत्येक भारतीय की जिम्मेदारी है। हर भारतीय को महिलाओं के प्रति अपनी सोच बदलने और महिला सशक्तिकरण के लिए बनाए गए नियमों का पालन कराने की आवश्यकता है। महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता क्यों आवश्यक है? ऐसे सवालों को समझने की बहुत आवश्यकता है। इन सवालों को सकारात्मक रूप से समझने और इस पर विचार करने की जरूरत है।महिलाओं के बारे में अपनी सोच को बदलना है। महिलाओं को अभी और आजादी देने की आवश्यकता है। यह उनका जन्मसिद्ध अधिकार है।
 मैं यह भी कहना चाहूंगी कि महिलाओं को भी अपनी पूर्व की सोच को बदलने की जरूरत है। इस सोच को तिलांजलि देनी होगी जिसमें यह सोचती है कि वह कमजोर है। समाज में समान अधिकार के लिए सक्षम नहीं है। यह सब सोचने के बजाय उन्हें यह समझना चाहिए कि वह पुरुषों से अधिक शक्तिशाली है। वह पुरुषों के मुकाबले  बहुत बेहतर कार्य करने में सक्षम है।
महिलाओं के लिए ऐसा कोई भी क्षेत्र नहीं है जहां उन्होंने अपनी काबिलियत को साबित नहीं किया हो l हर क्षेत्र में वह पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हुई है। अब यह समझना होगा कि देश के विकास को आगे बढ़ाने के लिए महिलाओं का सशक्त होना बहुत महत्वपूर्ण है। जब एक महिला पूरी पीढ़ी को संस्कार और आगे बढ़ने की हिम्मत देती है तभी वह आगे जाकर दूसरे परिवार में अपने यही संस्कारों को वापस करती है। दरअसल भारत में महिलाओं के पिछड़ेपन के बहुत से कारण हैं। जैसे कि लिंग आधारित हिंसा, स्वास्थ्य विषय, आर्थिक भेदभाव, हानिकारक पारंपरिक प्रथाएं, लैंगिक असमानता और सामाजिक नियम।
 मेरा मानना है कि महिला और पुरुष दोनों अद्वितीय हैं।दोनों के ही अलग दृष्टिकोण  होते हैं l इसलिए निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावशाली बनाने के लिए दोनों का साथ महत्वपूर्ण है। समाज में पुरुषों और महिलाओं, दोनों के अधिकारों की समानता जहां कार्य क्षमता को बढ़ावा देगी वहीं देश की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा।
घर में हमारा कार्य सिर्फ भोजन बनाने, कपड़े धोने तक ही सीमित नहीं है। हमारे समाज और परिवार में महिलाओं पर ही सुबह जल्दी उठने, घरेलू कामकाज करने और पूरे परिवार की भलाई और समृद्धि के लिए पूजा करने की जिम्मेदारी होती है। बिटिया को बचपन से ही घर के कामकाज और जिम्मेदारियों को निभाने के लिए ही बताया जाता है जबकि पुरुषों की तरह नेतृत्व करने के लिए हतोत्साहित किया जाता है क्यों...? उन्हें केवल परिवार और समाज तक ही सीमित रहने के लिए क्यों कहा जाता है। 
महिलाएं आदि शक्ति का रूप है,  पुरुषों के साथ मिलकर पूरी शक्ति बन सकती हैं। सामाजिक व पारिवारिक कठिनाइयों का भी सामना कर सकती है। कुछ प्रगतिशील देशों को छोड़कर हर देश में महिलाओं को पुरुषों की तरह आजादी प्राप्त नहीं है। हम सभी को महिला सशक्तिकरण के लिए महिलाओं की आर्थिक सामाजिक और शैक्षिक तरक्की को बढ़ावा देना चाहिए।
महिला सशक्तिकरण के द्वारा सरकारी और निजी क्षेत्रों में महिला रोजगार को बढ़ावा देकर तरक्की और अवसरों को बढ़ावा दिया जा सकता है।

 यूपी की योगी सरकार के
अच्छे और अहम कदम 
अभी हाल ही में यूपी सरकार द्वारा एक बड़ा कदम उठाया गया है। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कुछ कठोर नियम भी लागू किए गए हैं।योगी सरकार ने महिला कर्मचारियों के लिए कुछ नए नियमों की घोषणा की है। अब सरकारी और प्राइवेट कंपनियों की मनमानी नहीं चलेगी। इनमें कुछ नियम इस प्रकार है कि किसी भी महिला कर्मचारी को उसके लिखित सहमति के बिना सुबह 6:00 बजे से पहले और शाम 7:00 बजे के बाद काम करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। अगर महिला कर्मचारी शाम 7:00 बजे के बाद और सुबह 6:00 बजे से पहले काम करने से मना करती है तो उसे नौकरी से भी नहीं निकाला जा सकता। जो महिला कर्मचारी शाम 7:00 बजे से सुबह 6:00 बजे तक के बीच काम करती हैं तो घर से काम करने की जगह तक लाने के लिए फ्री ट्रांसपोर्ट और उनके भोजन की व्यवस्था और उनकी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी नियोक्ता की होगी। अकेली महिला कर्मचारी को ड्यूटी पर लगा सकता। विशेष विभाग में कम से 4 महिला कर्मचारी साथ में ड्यूटी करेंगी। वर्किंग प्लेस के नजदीक ही उनके लिए टॉयलेट, बॉथरूम, चेंजिंग रूम, पानी पीने की व्यवस्था और प्रकाश की व्यवस्था करनी होगी। नियोक्ता को इन सभी व्यवस्थाओं की जानकारी संबंधित क्षेत्र के फैक्ट्री इंस्पेक्टर को देनी होगी ताकि उसकी पुष्टि की जा सके। कोई महिला कर्मचारी नाइट शिफ्ट काम नहीं करना चाहती है तो उसे जबरन बुलाया भी नहीं जा सकता है।

लेखिका काउंसलर परिवार परामर्श केंद्र, साइबर एक्सपर्ट ,प्रधानाचार्य, प्रमुख समाज सेवी हैं 

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