यूपीसीए की मनमानी का है नतीजा पूरन डावर का इस्तीफा

यूपी में क्रिकेट एसोसिएशन का

रवैया खिलाड़ियों के खिलाफ



न्यूज़ स्ट्रोक
आगरा। डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन आगरा के अध्यक्ष पूरन डावर ने उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन  (यूपीसीए) की एपेक्स काउंसिल से इस्तीफा दे दिया है। पूरन डावर का इस्तीफा जाहिर करता है कि यूपीसीए में मनमानी चरम पर है। सभी को सिर्फ और सिर्फ अपने हितों की चिंता है,  खिलाड़ियों की नहीं।
 दरअसल पूरन डावर एक ऐसा नाम है जो कभी भी विवादों में नहीं रहता। इसलिए उन्होंने यूपीसीए की कमेटी से खुद को दूर रखते हुए यूपीसीए के अध्यक्ष और सचिव को अपना इस्तीफा भेजा है। जानकारी के मुताबिक उत्तर यूपीसीए की वर्चुअल तरीके से हुई वार्षिक आम सभा (एजीएम) में विवाद हो गया, जिस पर शुक्रवार को एपेक्स कमेटी के सदस्य पूरन डावर ने इस्तीफा दे दिया।
 न्यूज़ स्ट्रोक से बातचीत में पूरन डावर ने  कहा कि मीटिंग में क्रिकेट खिलाड़ियों के साथ हो रही कमियों अन्याय पर कोई चर्चा नहीं की जाती। आवाज उठाने से रोका जाता है। ऐसे में जब अपनी बात ही नहीं रख सकते तो कमेटी में रहने का क्या मतलब है।
आगरा के उद्यमी और एपेक्स कमेटी के सदस्य पूरन डावर ने अपने त्यागपत्र में कहा कि एजीएम वर्ष में एक बार होती है, वर्ष भर में क्या हुआ, उत्तर प्रदेश का क्रिकेट कहां पहुंचा, क्या उपलब्धि रही, क्या कमियां रहीं, उन्हें कैसे दूर किया जाए समेत अन्य बिंदुओं पर चर्चा होनी होती है। इन बातों के अलावा यूपी क्रिकेट टीम का प्रदर्शन क्यों कर रहा है, छोटी-छोटी टीमों से क्यों हार रही है, इस तरह के तमाम सवाल हैं, जिन पर कोई बात नहीं होती। ऐसे में कमेटी में बने रहने का कोई मतलब ही नहीं होता।
पूरन डावर का इस्तीफा यूपीसीए के लिए बड़ा झटका है। इस झटके से उबरने के लिए यूपीसीए के सूत्र कह रहे हैं कि आयु सीमा के कारण पूरन डावर पहले ही मेंबरशिप से हटाये जा चुके हैं।


पूरन डावर हाल ही में आगरा के क्रिकेटरों के साथ हुए भेदभाव को ऊपर तक रखते रहे हैं। उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन में ऐसे लोगों को दूर रखना मुनासिब समझा जाता है क्यूंकि वहां सच नहीं सुना जाता।


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