पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय का निधन



न्यूज़ स्ट्रोक
आगरा, 2 सितंबर। उत्‍तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र के दिग्गज नेता और पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्‍याय का निधन हो गया है। वह 65 साल के थे। इस दुखद खबर के बाद उनके समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गयी। लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे उपाध्याय को आगरा स्थित आवास से देर रात हालत बिगड़ने पर आगरा के रेनबो अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
रामवीर उपाध्याय हाथरस की सादाबाद सीट से पूर्व विधायक थे। मायावती सरकार में ऊर्जा मंत्री रहे। उपाध्याय हाथरस में पांच बार लगातार विधायक रहे। 1996 से 2017 तक हाथरस सदर, सिकंदराराऊ व सादाबाद सीट से विधायक रहे। हाथरस में भारतीय जनता पार्टी से अपनी राजनीति की शुरुआत करने वाले रामवीर उपाध्याय ने करीब तीन दशक पहले टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर पार्टी छोड़ दी थी। 25 वर्ष बसपा में सफर के बाद भाजपा में फिर शामिल हुए थे।
बसपा में रामवीर उपाध्याय कद्दावर नेता थे और उन्होंने कई बार मंत्री और अन्य पदों पर रहकर राजनीति के अर्श को छुआ था। हाथरस की राजनीति में रामवीर का नाम बड़े नेता के रूप में हमेशा से रहा है। राम मंदिर आंदोलन के दौरान रामवीर उपाध्याय भाजपा में थे। उभरते हुए नेता के रूप में उन्होंने वर्ष 1993 में हाथरस सदर सीट से भाजपा से टिकट के लिए दावेदारी की, लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दी। राजवीर पहलवान को प्रत्याशी बनाया था। इससे नाराज होकर रामवीर उपाध्याय निर्दलीय मैदान में उतरे थे और चुनाव हार गए थे। इसके बाद वह 1996 में बसपा में शामिल हुए और हाथरस सदर सीट से चुनाव लड़े। भारी बहुमत से चुनाव जीतकर वह विधायक बने। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वर्ष 2002 और 2007 में हाथरस सदर, वर्ष 2012 में सिकंदराराऊ और 2017 से वह सादाबाद से विधायक बने।
इस बीच वह ऊर्जा, परिवहन, चिकित्सा शिक्षा, समेत कई अहम विभागों के मंत्री रहे। बसपा ने उन्हें लोक लेखा समिति के सभापति भी बनाया। विधानमंडल दल में मुख्य सचेतक भी रामवीर उपाध्‍याय रहे हैं। 2022 के चुनाव में हाथरस की सादाबाद सीट से भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़े लेकिन जीत नहीं पाए। रालोद के प्रत्याशी प्रदीप चौधरी गुड्डू ने उन्हें हराया।
उनका आगरा से गहरा जुड़ाव रहा। ब्राह्मण समाज में उनकी खासी पकड़ थी। वर्ष 2009 में उन्होंने पत्नी सीमा उपाध्याय को आगरा की फतेहपुरसीकरी लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा। वह राजबब्बर को हराकर चुनाव जीती थीं। 
मूलरूप से सादाबाद निवासी रामवीर उपाध्याय ने बसपा सरकार के दौरान ही आगरा को अपनी कर्मभूमि बना लिया था। उन्होंने शास्त्रीपुरम में आवास बनवाया। बसपा के कद्दावर नेता रहे रामवीर उपाध्याय का पार्टी से वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान मोहभंग हो गया था। उनकी पत्नी सीमा उपाध्याय और भाई मुकुल उपाध्याय पहले ही भाजपा का दामन थाम चुके थे।

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