जया किशोरी ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और गोवर्धन पूजा की कथा का किया भक्तिमय वर्णन


👍श्रीश्याम परिवार सेवा ट्रस्ट की श्रीमद्भागवत कथा में  प्रथम करी हरि माखन चोरी...,राधिका गोरी से बिरज की छोरी से... भजनों पर झूमे श्रद्धालु

न्यूज़ स्ट्रोक 

आगरा, 27 जुलाई 2026। मैया यशोदा से चांद को खिलौना समझकर मांगने की जिद, राधा से विवाह की हठ, माखन चोरी, ओखल लीला और गोवर्धन पूजा जैसी श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन सुन श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। पूतना वध सहित अन्य राक्षसों के संहार और श्रीकृष्ण के दर्शन के लिए पहुंचे भगवान शिव के प्रसंग पर कथा स्थल राधा-कृष्ण के जयकारों से गूंज उठा। श्रीश्याम परिवार सेवा ट्रस्ट द्वारा फतेहाबाद रोड स्थित राजदेवम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन व्यासपीठ से पूज्यश्री जया किशोरी ने भक्तिमय कथा का रसपान कराया। इस दौरान छोटे-छोटे बच्चे राधा-कृष्ण के स्वरूप में सजकर पहुंचे।
उन्होंने कहा कि भगवान की प्रत्येक लीला लोककल्याण के लिए है। माता-पिता से आह्वान किया कि जैसे माता यशोदा श्रीकृष्ण की हर छोटी बात ध्यान से सुनती थीं, वैसे ही बच्चों की छोटी-छोटी बातों को भी गंभीरता से सुनें। यदि उनकी बातों को अनदेखा किया जाएगा तो बड़े होने पर वे महत्वपूर्ण बातें भी छिपाने लगेंगे। बच्चों को समय देना आवश्यक है।
नंद भवन में उड़ रही धूल..., श्याम सपनों में आता क्यों नहीं..., राधिका गोरी से बिरज की छोरी से मैया करा दे मेरो ब्याह... जैसे भजनों पर श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे। इस अवसर पर बाबू रोशनलाल गुप्ता, राजकुमार गुप्ता, राधा गुप्ता, विकास मांगलिक, जयश्री मांगलिक, अनिल गुप्ता, विनीत मांगलिक, ऋषिक मांगलिक, अर्पित गुप्ता, अंजू मांगलिक, तनु मांगलिक, रेखा गुप्ता, आकांक्षा गुप्ता, अलका गुप्ता, नीता गुप्ता, साक्षी गुप्ता, अर्चना गुप्ता, नितेश शिवहरे, राखी शिवहरे, प्रदीप गुप्ता, सुनील गुप्ता, राजीव गुप्ता, यश गुप्ता, अमन गुप्ता, रानी गुप्ता, विनीता गुप्ता सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
विदेशी ठप्पा लगे बिना अपनी चीजों पर विश्वास नहीं करते
जया किशोरी ने कहा कि गौमाता की हर वस्तु उपयोगी है, लेकिन हम तब तक अपनी चीजों पर विश्वास नहीं करते जब तक उन पर विदेशी ठप्पा न लग जाए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि विदेशों में पत्तियों की प्लेट को "ईको-फ्रेंडली" बताकर प्रस्तुत किया जाता है, जबकि हमारे यहां सदियों से पत्तलों का उपयोग होता आया है। उन्होंने कहा कि जब दुनिया में शिक्षा व्यवस्थित रूप से शुरू भी नहीं हुई थी, तब भारत में लाखों गुरुकुल थे। आज विदेशी हमारी ही परंपराओं को नई पैकेजिंग के साथ लौटा रहे हैं, ठीक दीपावली की सोन पापड़ी की तरह। मंत्रोच्चारण को भी आज मेडिटेशन का सर्वोत्तम माध्यम बताया जा रहा है, जबकि हमारे ऋषि-मुनि सदियों से इसका महत्व बताते आए हैं। उन्होंने युवाओं से अपने शास्त्र पढ़ने और अपनी संस्कृति पर विश्वास रखने का आह्वान किया।
घर की जिम्मेदारी पति-पत्नी दोनों की
उन्होंने कहा कि धन कमाना हो या घर संभालना, दोनों की जिम्मेदारी पति-पत्नी की है। श्रीकृष्ण के ग्वालों के साथ गाय चराने और गोपियों के दूध-दही बेचने के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बेटा-बेटी दोनों को कमाने के साथ घर के काम भी आने चाहिए। खाना बनाना, घर संभालना, रिश्तों को निभाना और जिम्मेदारियां साझा करना ही वास्तविक समानता है। परिवार तभी सुदृढ़ और सुखी बनता है।

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