श्रीजी इतना तो कीजै, जग जंजाल छुड़ाए वास वृन्दावन को दीजै...




-श्रीहरि सत्संग समिति एवं महिला समिति के तीन दिवसीय श्री राधाष्टमी महोत्सव का शुभारम्भ हुआ

न्यूज़ स्ट्रोक
आगरा, 03 सितम्बर। तीनों लोक के संचालक श्रीहरि की प्रेरणास्त्रोत श्रीजी के मानस स्वरूप के साक्षात दर्शन पाकर हर भक्त धन्य था। राधा रानी के जयकारों संग मेरो प्यारों नंदलाल, किशोरी राधे... के संकीर्तन से हर मन में भक्ति की रसधारा बह रही थी। श्रीहरि सत्संग समिति एवं महिला समिति द्वारा राधाष्टमी के उपलक्ष्य में श्रीराधाष्टमी महोत्सव (चरितामृतम) के तीन दिवसीय आयोजन का शुभारम्भ कमला नगर स्थित महाराजा अग्रवाल सेवा सदन में हुआ।
कथा वाचक पूज्य कीर्ति किशोरी ने श्रीराधा के स्वरूप का वर्णन कृपा कटाक्ष के माध्यम से करते हुए बताया कि श्रीजू के नाम का कीर्तन कोटि-कोटि जन्म को सुधार देता है। प्रेम रस की साक्षात प्रतिमूर्ति हैं, श्रीराधा। जहां राधा रानी अपने पैर धरती हैं वहां श्रीहरि अपने नयन धरते हैं। संसार श्रीजी की कृपा से ही प्रकट हुआ है। सारा संसार श्रीजी का ही है। जय वृन्दावन धाम जय श्री राधे-राधे, जय बरसानों धाम जय श्री राधे-राधे..., किशोरी इतना तो कीजै जग जंजाल छुड़ाए वास बरसाने को दीजै... जैसे कीर्तन ने कथा स्थल को मानों बरसाना धाम बना दिया। महोत्सव का शुभारम्भ राधा रानी व श्रीकृष्ण की प्रतिमा के समक्ष दीप जालकर व आरती कर किया गया। 
इस अवसर पर मुख्य रूप से मुख्य अतिथि व महिला कल्याण मंत्री बेबीरानी मौर्य, पूर्व विधायक केशो मेहरा मुख्य जयमान प्रदीप गोयल, बबिता, राजकुमारी अशोक अग्रवाल, आयोजन समिति के अध्यक्ष राधा बल्लभ अग्रवाल, महामंत्री भगवान दास बंसल, संयोजक संजय गोयल, संजय मित्तल, उमेश कंसल, रमेशचंद मित्तल, महिला समिति की अध्यक्ष अंशु अग्रवाल, सोनिया गर्ग, उर्मिल बंसल, दर्शिका मित्तल, निहारिका अग्रवाल, सीमा बंसल, रश्मि सिंघल, मीनू त्यागी, सीमा अग्रवाल आदि उपस्थित थीं। संचालन रुचि अग्रवाल ने किया।

एक ओर अट्टालिकाएं तो दूसरी ओर झोपडिय़ां बढ़ती गईं...
आगरा। मुख्य वक्ता केन्द्रीय एकल अभियान प्रमुख माधवेन्द्र सिंह कहा कि भक्ति कल्याण के लिए है। शिव की पूजा करते करते हमें शिव बनने का प्रयास करना चाहिए। लेकिन हम चरम स्वार्थी हो गए। भारत में घरों में पूजने वाली श्री की कृपा तो बरसी लेकिन कुछ परिवारों पर ही। एक ओर अट्टालिकाएं बनती गईं तो दूसरी ओर झोपडिय़ों की संख्या बढती गईं। इसका बाहरी लोगों ने फायदा उठाया और खंडित करते करते भारत को आज के स्वरूप में पहुंचा दिया। 

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