राम का चरित्र अनुकरणीय और कृष्ण का चरित्र है अनुशरणीय



न्यूज़ स्ट्रोक 
आगरा, 14 अप्रैल । लंगड़े की चौकी हनुमान मंदिर में हनुमान जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के अंतर्गत गुरुवार को वामन अवतार की कथा, राम जन्म से लेकर रावण वध के बाद अयोध्या वापसी की कथा और श्रीकृष्ण के जन्म लेने की कथा का वर्णन किया गया।
व्यास गद्दी से आचार्य हिमांशु धर शास्त्री ने कहा कि भगवान वामन ने लघु रूप धारण कर संदेश दिया कि मनुष्य कितना भी बड़ा हो उसे हमेशा लोक दृष्टि से संसार व समाज परिवार में छोटे बनकर रहना चाहिए। छोटे बनकर रहने से प्राणी को दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ता है। इसलिए मनुष्य को हमेशा विनम्रता, सरलता, सहजतापूर्वक अपना जीवन व्यतीत करना चाहिए। कथावाचक हिमांशु धर शास्त्री ने कहा कि भगवान वामन राजा बलि के यज्ञ को परिपूर्ण कराने के लिए यज्ञशाला मे पहुंचे। राजा बलि ने भगवान वामन का षोडशोपचार से पूजन करते हुए भगवान को लोक दृष्टि से बहुत मान किया। भगवान वामन प्रसन्न हुए। भगवान से राजा बलि के समस्त पूर्वजों की प्रशंसा सुनकर राजा बलि ने भगवान बामन से कुछ भी दान मांगने के लिए कहा। उन्होंने राजा से तीन पग भूमि मांगी। राजा बलि ने तीन पग भूमि देने के लिए संकल्प किया। भगवान ने तीन पग में सब कुछ नाप लिया।
राम और कृष्ण के चरित्र पर प्रकाश डालते हुए शास्त्री जी ने कहा कि प्रभु श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण वास्तव में एक ही तत्व हैं, लेकिन अंतर सिर्फ इतना है की जहां एक ओर प्रभु श्री राम का चरित्र अनुकरणीय है। वहीं दूसरी ओर भगवान नंदनंदन श्री कृष्ण का चरित्र अनुशरणीय है। दोनों धरती पर पाप का नाश करने और धर्म की स्थापना के लिए आए। दोनों का चरित्र अलग अलग है। कथा के दौरान गोविंद गुरु, गोपाल गुरु, गोपी गुरु और राम उपाध्याय आदि मौजूद रहे।

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