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नई दिल्ली/आगरा, 31 जनवरी। भारतीय अर्थव्यवस्था नया मोड़ लेने को तैयार है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार, 1 फ़रवरी 2026 को सुबह 11 बजे संसद में भारत का केंद्रीय बजट 2026–27 पेश करेंगी, जो उनका लगातार नौवाँ बजट होगा। यह बजट मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का दूसरा पूर्ण बजट और कई मायनों में निर्णायक माना जा रहा है।
🎯 बजट का महत्व
आर्थिक सर्वे में सरकार ने सुझाव दिया है कि भारत की विकास दर (GDP Growth) अगले वित्त वर्ष में 6.8%–7.2% तक रहने की संभावना है — यह वैश्विक चुनौतियों के बीच भी मजबूत घरेलू मांग को दर्शाता है।
💡 लोगों को इस बजट से क्या-क्या उम्मीदें हैं
🧑🌾 1. किसानों के लिए राहत
कृषि क्षेत्र से जुड़ी योजनाओं में पेमेन्ट और सहायता राशि बढ़ाने की उम्मीद है। उदाहरण के लिए, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) की राशि ₹6,000 से बढ़ाकर लगभग ₹9,000 तक की जाने पर चर्चा हो रही है।
📈 2. टैक्स में सुधार और राहत
बहुत से विशेषज्ञों का मानना है कि बजट में:
इनकम टैक्स नियमों को आसान बनाया जा सकता है,
टैक्स स्लैब में संभावित बदलाव,
होम लोन पर अधिक छूट,
बचत खाते के ब्याज पर लाभ बढ़ाया जाना चाहिये।
इससे मिडिल क्लास और टैक्सपेयर को सीधी राहत मिल सकती है।
🚆 3. रेलवे, इंफ्रास्ट्रक्चर और रोज़मर्रा की सेवाएं
आम जनता की निगाह रेलवे, पेट्रोल-डीज़ल, स्वास्थ्य, शिक्षा और दैनिक खर्चों पर असर डालने वाले बजट प्रावधानों पर भी है।
🏭 4. उद्योग और MSMEs
लुधियाना जैसे औद्योगिक केंद्रों ने बजट से GST में सुधार, निर्यात लागत में कमी, इनपुट टैक्स क्रेडिट और R&D इनसेटिव्स जैसी मांगें रखी हैं — इससे MSME सेक्टर को मजबूती मिलने की उम्मीद है। �
📡 5. टेलीकॉम और डिजिटल सेक्टर
टेलीकॉम कंपनिया भी परमिट शुल्क, डिजिटल इंडिया फंड सपोर्ट और GST सवलत की मांग कर रही हैं, जिसका लाभ आम उपयोगकर्ता भी महसूस कर सकते हैं।
💰 फोकस: वृद्धि बनाम खर्च
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट उपभोक्ता खर्च को बढ़ाने के बजाय विकास को मज़बूत करने पर जोर देगा।
सरकार को राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) को 4.4% के स्तर पर बनाए रखना है, जबकि ब्याज दर, सार्वजनिक निवेश और रक्षा खर्च में प्राथमिकता बढ़ सकती है।
📈 निवेशकों की “मांग सूची
बाज़ार विश्लेषकों की अपेक्षाएँ भी बजट में शामिल हैं:
दीर्घकालिक पूंजी लाभ कर (LTCG) में ढील,
निर्यात बढ़ाने के उपाय,
बुनियादी ढांचे पर निवेश को प्रोत्साहन —
ये कदम निवेशकों और शेयर बाज़ार को सकारात्मक संकेत दे सकते हैं।
संभावित बजट
🧠 निष्कर्ष: क्या होगा संभावित बजट?
📌 सरल, पर देश की विकास दिशा पर केंद्रित बजट
इस बजट का रुख शायद ठोस विकास, रोजगार, औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और टैक्स सुधारों पर रहेगा। आम जनता और मध्यम वर्ग के लिए टैक्स राहत, कृषि और छोटे उद्योगों के लिए समर्थन योजनाओं की उम्मीद है। बजट का संतुलन विकास और ऋण नियंत्रण के बीच बनाये रखना भी सरकार की प्राथमिकता होगी।
स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) में वृद्धि
विशेषज्ञों का मानना है कि बजट में स्टैंडर्ड डिडक्शन को ₹75,000 से बढ़ाकर लगभग ₹1,00,000 तक किया जा सकता है।
➡️ इससे सैलरीभोगी करदाताओं को सीधे राहत मिलेगी, क्योंकि टैक्सेबल इनकम कम हो जाएगी।
📌 उदाहरण:
अगर स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹1,00,000 हो जाता है, तो 12.75 लाख की सैलरी पर टैक्स-फ्री सीमा करीब 13 लाख तक पहुंच सकती है।
📊 2. आयकर स्लैब में बड़े बदलाव की
हालांकि संभावना कम
विशेषज्ञ मान रहे हैं कि बड़े स्लैब दरों में बदलाव — जैसे बेसिक एक्सेम्पशन लिमिट का काफी ऊपर ले जाना — इस बजट में बहुत संभावित नहीं है।
➡️ इसका कारण यह है कि पिछले बजट में ही स्लैब और रिबेट में बड़ा बदलाव किया गया था।
📈 3. धारा 80C, 80D जैसी छूटों में संभावित संशोधन
टैक्स सेविंग डिडक्शंस पर भी कुछ बदलाव/वृद्धि की मांग उठ रही है:
80C (जैसे PPF, ELSS, LIC आदि) की लिमिट को पुरानी स्थिति से ऊपर बढ़ाने का सुझाव।
80D (हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम) की छूट को भी बढ़ाने की अपेक्षा — खासकर स्वास्थ्य खर्च बढ़ने के मद्देनज़र।
ये बदलाव सीधे टैक्स-पेयर की बचत क्षमता को सुधार सकते हैं।
🎯 4. पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Regime) का रोल
कुछ विश्लेषक कहते हैं कि सरकार धीरे-धीरे Old Tax Regime को हटाने की दिशा में काम कर सकती है और New Tax Regime को और अधिक आकर्षक बनाने पर जोर दे सकती है — लेकिन कोई बड़ा बदलाव अचानक इस बजट में नहीं होगा।


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