संसार में दो ही तीर्थ, भगवान की कथा और चरणों से निकली गंगा

 

 चौथे दिन की कथा के समापन पर आरती करते मंदिर के महंत गोविंद गुरु तथा अन्य भक्तजन।

न्यूज़ स्ट्रोक
अगरा, 13 अप्रैल। लंगड़े की चौकी हनुमान मंदिर में हनुमान जन्मोत्सव के तहत जारी श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन व्यास गद्दी पर विजराजमान बद्रीनाथ धाम से आए आचार्य हिमांशु धर शास्त्री ने कहा कि इस संसार में दो सबसे बड़े तीर्थ हैं और वो हैं भगवान की कथा और भगवान के चरणों से निकली गंगा।
बुधवार को मंदिर परिसर में मौजूद भक्तों को भागवत कथा का रसपान कराते हुए आचार्य ने भक्त प्रह्लाद और अजामिल की कथाएं सुनाईं। उन्होंने कथा के माध्यम से बताया कि नाम का विशेष महत्व है। प्रभु का नाम लेने से जन्मों के पाप कट जाते हैं। नाम से तो पत्थर पानी पर तैर जाते हैं। अजामिल जैसा पापी अपने पुत्र नारायण का नाम अपने अंत समय में लेने के चलते सारे कष्टों से मुक्त हो गया। उसने मृत्यु के भक्त अपने पुत्र नारायण को पुकारा। इस पर नारायण यानी भगवान विष्णु के पार्षद उसे लेने आ गए। वहीं भक्त प्रह्लाद ने ओम नमो भगवते वासुदेवाय का सतत जाप करते हुए अपने शक्तिशाली असुर पिता हिरण्यकश्प के हर वार को बेकार साबित कर दिया। भक्त प्रह्लाद नाम के सहारे महान भक्त और राजा बना। आचार्य ने कहा कि गंगा, गौ और गायत्री का जहां पूजन होता है वहां सारे काम पूरे होते हैं।
कथा के अंत में महंत गोविंद गुरु ने आरती की। इस दौरान महंत डोरी दास उपाध्याय, गोपाल गुरु, गोविंद गुरु, राम उपाध्याय समेत बड़ी संख्या में भक्तजन मौजूद रहे। 

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