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| भागवत भगवान का पूजन करते मंदिर के महंत गोविंद गुरु, गोपाल गुरु, गोपी गुरु। व्यास गद्दी पर मौजूद है आचार्य हिमांशु धर शास्त्री |
👍 लंगड़े की चौकी हनुमान मंदिर पर आयोजित 10 दिवसीय हनुमान जन्मोत्सव के दूसरे दिन शुरू हुई श्रीमद्भागवत कथा
न्यूज़ स्ट्रोक
आगरा, 10 अप्रैल। शहर के प्राचीन लंगड़े की चौकी हनुमान मंदिर पर 10 दिवसीय हनुमान जन्मोत्सव के दूसरे दिन आज रामनवमी पर श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। मंदिर परिसर में यह 49वीं भागवत कथा है। इससे पूर्व प्रथम दिन मंदिर के प्रमुख महंत डोरीदास उपाध्याय ने हनुमान जी की अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित कर इस जन्मोत्सव की शुरुआत की।
श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन बद्रीनाथ धाम से आए आचार्य हिमांशु धर शास्त्री ने भागवत महात्म्य, धुंधकारी और गौकर्ण की कथा सुनाई। साथ ही कथा में श्रोताओं की श्रेणियां बताईं। भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण में कोई भेद नहीं, यह व्याख्या की।
व्यास गद्दी से हिमांशु धर शास्त्री ने कहा कि भागवत का अर्थ है भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और तारण। प्रेत योनि से मुक्त करने वाली है यह भागवत कथा। जब सौभाग्य का उदय होता है तभी भागवत कथा सुनने मिलती है। भगवान सत्य स्वरूप हैं। चित्त स्वरूप हैं। आनंद स्वरूप हैं। उन्होंने कहा कि आत्मदेव ब्राह्मण की कोई संतान नहीं थी। निराश ब्राह्मण को एक संत ने फल दिया, कहा पत्नी को खिलाना लाभ होगा। पत्नी ने स्वयं न खाकर गाय को दे दिया और पति से झूठ बोल दिया। समय पूर्ण होने पर पत्नी धुंधली ने अपनी बहन का पुत्र लिया और स्वयं का बताकर नाम धुंधकारी रखा। उसी समय गाय को भी पुत्र हुआ, जिसका नाम गौकर्ण रखा गया। धुंधकारी अत्याचारी, अहंकारी था जबकि गौकर्ण विद्वान था। धुंधकारी से परेशान ब्राह्मण वन गमन कर गए। मां धुंधली ने परेशान होकर आत्महत्या कर ली। धुंधकारी की वेश्याओं ने निर्मम हत्या कर दी। असमय मौत ने उन्हें प्रेत बना दिया। परिजनों की मुक्ति की आकांक्षा से गौकर्ण ने भागवत सप्ताह यज्ञ कराया। जिससे प्रेत योनि से मुक्ति मिली।
आचार्य ने यह भी कहा कि भगवान के अवतारों में भेदभाव करना नामापराध है। भगवान के अवतारों में भेद बुद्धि नहीं लगानी चाहिए। राम और कृष्ण में तो कोई अंतर नहीं है। वही रंग, वहीं पीतांबर। अंतर मानना गलत है।
कथा के प्रथम दिवस के अंत पर महंत गोविंद उपाध्याय, गोपाल गुरु, गोपी गुरु ने भागवत भगवान की आरती की और पूजन किया। इस दौरान राम उपाध्याय, लक्ष्मण, भरत, श्याम, राघवेंद्र समेत अनेक भक्तजन मौजूद रहे।


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