न्यूज़ स्ट्रोक
आगरा, 21 सितम्बर। कोठी मीना बाजार गुरुवार को अयोध्या नगरी बन गई। चित्रकूट धाम में आयोजित श्री राम कथा में व्यास पीठ पर विराजमान श्री कामदगिरि पीठाधीश्वर श्रीमद् जगतगुरु राम नंदाचार्य स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज ने भए प्रकट कृपाला दीनदयाला, कौशल्या हितकार, हर्षित महतारी मुनि मनहारी, अद्बुद्भ रूप निहारी... दोहे का पूर्ण वर्णन किया हर तरफ श्रीहरि के जयकारे गूंजने लगे।
श्री कामतानाथ सेवा समिति द्वारा कोठी मीना बाजार (चित्रकूट धाम) में आयोजित की जा रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा में आज दूसरे दिन श्री कामदगिरि पीठाधीश्वर श्रीमद् जगतगुरु राम नंदाचार्य स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज ने मनु व रानी सतरूपा की कथा का वर्णन करते हुए श्रीराम जन्म प्रसंग का संगीतमय वर्णन किया।
आगरा, 21 सितम्बर। कोठी मीना बाजार गुरुवार को अयोध्या नगरी बन गई। चित्रकूट धाम में आयोजित श्री राम कथा में व्यास पीठ पर विराजमान श्री कामदगिरि पीठाधीश्वर श्रीमद् जगतगुरु राम नंदाचार्य स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज ने भए प्रकट कृपाला दीनदयाला, कौशल्या हितकार, हर्षित महतारी मुनि मनहारी, अद्बुद्भ रूप निहारी... दोहे का पूर्ण वर्णन किया हर तरफ श्रीहरि के जयकारे गूंजने लगे।
श्री कामतानाथ सेवा समिति द्वारा कोठी मीना बाजार (चित्रकूट धाम) में आयोजित की जा रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा में आज दूसरे दिन श्री कामदगिरि पीठाधीश्वर श्रीमद् जगतगुरु राम नंदाचार्य स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज ने मनु व रानी सतरूपा की कथा का वर्णन करते हुए श्रीराम जन्म प्रसंग का संगीतमय वर्णन किया।
कथा व्यास ने कहा कि भक्ति का स्वरूप सादगी, सरलता और सौम्यता है। जबकि ज्ञान में अहंकार आ जाता है। भक्ति में सरतला के कारण से हर कोई धारण कर सकता है। भक्ति और प्रेम भाव के कारण ही श्रीहरि माता कौशल्या की गोद में आए। मनु व रानी सतरूपा की तपस्या की कथा और श्रीहरि द्वारा उनके यहां (राजा दशरथ व रानी कौशल्या के यहां) पुत्र रूप में जन्म लेने की कथा का विस्तारपूर्णक वर्णन किया। कथा से पूर्व यज्ञाचार्य राहुल रावत, किशोर लवानिया ने बनारस से आई 21 ब्राह्मणों के साथ यज्ञ सम्पन्न कराया। इस अवसर पर मुख्य रूप से जयप्रकाश त्यागी, ऋषि उपाध्याय, रणवीर सोलंकी, मोहित शर्मा, विनय चाहर, रविंद्र सिंह पप्पू, विनोद त्यागी, अर्जुन त्यागी आदि उपस्थित थे।
मोबाइल पर ही सही प्रतिदिन
राम चरित मानस अवश्य पढ़ें
आगरा। श्री रामस्वरूपाचार्य महाराज ने कहा कि आज लोग पड़ोसी कम संतान से ज्यादा परेशान करें। लगभग 60 प्रतिशत भक्त बच्चों की शिकायतें लेकर आते हैं। बच्चों की संस्कारवान, जीवन जीने का सलीका और सलरता, सम्बंधों का महत्व समझना है तो मोबाइल पर ही सही उनमें रामचरित मानस पढ़ने की आदत डालें। राम कथा सुनने से देह संत बने न बने ध्येय अवश्य संत बन जाएगा।
प्रतिभा को बिना किसी पक्षपात के सम्मान दें
आगरा। श्री रामस्वरूपाचार्य महाराज ने कहा कि हमारा देश प्रतिभा प्रधान देश है। बिना किसी पक्षपात (जात-पात के बिना) के प्रतिभाओं का सम्मान होना चाहिए। कोई भी प्रतिभा सिर्फ परिवार की नहीं बल्कि देश की होती है। रैदास और संत कबीर प्रतिभा के सम्मान का प्रमाण हैं हमारे देश में। श्रीराम ने भी केवट से मित्रता और शबरी के बेर खाकर उन्हें सम्मान दिया। व्यक्ति की अवस्था (उम्र और पद) के अनुसार भी से सम्मान मिलना चाहिए। परन्तु आज वोटों की राजनीति ने मर्यादा को छिन्न भिन्न कर दिया है। सत्ता का रास्ता सुविधा का रास्ता होता है। रानी सतरूपा की तरह सिद्धान्त का रास्ता चुनिए।



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