इस लोक के कर्तव्य पूरा कर परलोक जाना ही पड़ता है

 लंगड़े की चौकी हनुमान मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन कथा का श्रवण कराते आचार्य हिमांशु धर शास्त्री.

न्यूज़ स्ट्रोक
आगरा, 11 अप्रैल। लंगड़े की चौकी हनुमान मंदिर में जारी 10 दिवसीय हनुमान जन्मोत्सव के तीसरे और श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन आचार्य हिमांशु धर शास्त्री ने परीक्षित जन्म कथा, पांडवों के स्वर्गारोहण की कथा और भगवान श्रीकृष्ण के द्वारा अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से परीक्षित को बचाने की कथा का रोचक और सार गर्भित वर्णन किया।
व्यास गद्दी से बताया गया कि वज्र को इंद्रप्रस्थ का राजा बनाने के बाद अर्जुन महर्षि वेदव्यास के आश्रम पहुंचे। यहां आकर अर्जुन ने महर्षि वेदव्यास को बताया कि श्रीकृष्ण, बलराम सहित सारे यदुवंशी समाप्त हो चुके हैं। तब महर्षि ने कहा कि यह सब इसी प्रकार होना था। इसलिए इसके लिए शोक नहीं करना चाहिए। तब अर्जुन ने ये भी बताया कि किस प्रकार साधारण लुटेरे उनके सामने यदुवंश की स्त्रियों को हर कर ले गए और वे कुछ भी न कर सके।
अर्जुन की बात सुनकर महर्षि वेदव्यास ने कहा कि वे दिव्य अस्त्र जिस उद्देश्य से तुमने प्राप्त किए थे, वह पूरा हो गया। अत: वे पुन: अपने स्थानों पर चले गए हैं। महर्षि ने अर्जुन से यह भी कहा कि तुम लोगों ने अपना कर्तव्य पूर्ण कर लिया है। अत: अब तुम्हारे परलोक गमन का समय आ गया है और यही तुम्हारे लिए श्रेष्ठ भी है। महर्षि वेदव्यास की बात सुनकर अर्जुन उनकी आज्ञा से हस्तिनापुर आए और उन्होंने पूरी बात महाराज युधिष्ठिर को बता दी। यदुवंशियों के नाश की बात जानकर युधिष्ठिर को बहुत दुख हुआ। महर्षि वेदव्यास की बात मानकर द्रौपदी सहित पांडवों ने राज-पाठ त्याग कर परलोक जाने का निश्चय किया। युधिष्ठिर ने युयुत्सु को बुलाकर उसे संपूर्ण राज्य की देख-भाल का भार सौंप दिया और परीक्षित का राज्याभिषेक कर दिया।



कथा के अंत में महंत गोविंद गुरु ने आरती की। इस अवसर पर महंत डोरी दास उपाध्याय, गोपाल गुरु, गोपी गुरु, राम उपाध्याय, भरत, लक्ष्मण, श्याम, चेतन शर्मा आदि मौजूद रहे।
 

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