- शैक्षणिक कार्यशाला में समस्याओं और निदान पर हुआ मंथन
- सरकार से ऑनलाइन दवाओं की बिक्री बंद करने की अपील
- सरकार न चेती तो सड़कों पर उतरेंगे दवा व्यापारी, दी चेतावनी
न्यूज़ स्ट्रोक
आगरा, 21 अगस्त। दवाओं की ऑनलाइन सेल पूंजीपतियों की तिजोरी भर रही है और केमिस्ट के व्यापार का ग्राफ नीचे गिर रहा है। ऑन लाइन दवाओं की बिक्री के कारण प्रतिबंधित दवाएं भी आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। बिना बैच नम्बर के ऑनलाइन बिलों से माल आ रहा है जबकि बिना बैच के दवा के बिल बेकार हैं।
दवाओं की ऑनलाइन बिक्री को बंद करने के लिए सरकार के बातचीत चल रही है। सरकार नहीं चेती तो दवा व्यापारी एक दिन का भारत बंद करेंगे। अपने व्यापार को बचाने के लिए सड़कों पर उतरेंगे। पर्ल्स रिसॉर्ट में आयोजित आर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स (ओसीडी) उप्र द्वारा शैक्षणिक कार्यशाला में यह बात एआईओसीडी के अध्यक्ष जेएस शिंदे व सचिव राजीव सिंघल ने कहीं।
कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि एआईओसीडी के अध्यक्ष जेएस शिंदे व विशिष्ठ महासचिव राजीव सिंघल ने भगवान गणेश जी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि देश भर में दवा व्यापार से लगभग तीन करोड़ लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी है लेकिन आज गलत सरकारी नीतियों के कारण दवा व्यापार को ऑनलाइन बिक्री की मार से गुजरना पड़ रहा है। इसके कारण प्रतिबंधित दवाएं भी लोगों को आसानी से उपलब्ध हो रहीं हैं। फार्मासिस्ट की व्यवस्था खत्म हो रही है। ऑनलाइन सेल में नकली दवाएं भी आसानी से खपाई जा रहीं हैं, जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। हाल में ही एक ऑनलाइन कम्पनी द्वारा एक प्रोडक्ट एमआरपी से 72 प्रतिशत मार्जिन कम करके बेचा जा रहा था, लेकिन उसके बिल पर बेच नम्बर नहीं होता था। बिना बैच नम्बर के दवा के बिल का कोई महत्व नहीं। इससे साफ होता है कि ऑनलाइन सेल में नकली दवाएं धड़ल्ले से बेची जा रहीं हैं। कार्यक्रम में देश भर से लगभग 450 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
इस अवसर पर मुख्य रूप से ओसीडी यूपी के अध्यक्ष दिवाकर सिंह, महामंत्री सुधीर अग्रवाल, कोषाध्यक्ष महेश अग्रवाल आगरा फार्मा एसोसिएशन के अध्यक्ष ओमप्रकाश, महामंत्री महेश अग्रवाल, कोषाध्यक्ष संदीप गुप्ता व मीडिया प्रभारी मुकेश कुमार गर्ग और सुंदरलाल चेतवानी मौजूद थे।
परिजनों के नाम होलसेल का लाइसेंस
लेकर डॉक्टर कर रहे केमिस्टों का शोषण
आगरा फार्मा एसोसिएशन द्वारा आयोजित आम सभा में उप्र के विभिन्न जिलों से आए एसोसिएशन के सदस्यों ने दवा व्यापर व कम्पनियों द्वारा होलसेलरों पर की जा रही मनमानी से जुड़े सवाल भी पूछे। जिसका पदाधिकारियों द्वारा जवाब भी दिया गया। स्टॉक स्सेटमेंट अब कम्पनियां 15-15 में मांग रही हैं। कम्पनियों के सहयोग के कारण डॉक्टरों की होलसेल की दुकानें चल रही हैं। कम्पनियां डॉक्टरों की दुकानों पर सीधे सप्लाई कर रही हैं। पदाधिकारियों ने कहा कि लड़ाई का तरीका बदलना होगा, देश भर के कैमिस्टों को एकजुट होकर ऐसी कम्पनियां को विरोध करना होगा।
उप्र को 60 जिलों के पदाधिकारियों ने लिया भाग
कार्यशाला में उप्र के 60 जिलों के पदाधिकारियों सहित 450 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें आगरा फार्मा एसोसिएशन के सदस्य भी शामिल रहे। इसमें मुख्य रूप से रमेश चंद गुप्ता, शशि शंकर शर्मा, सुनील गुप्ता, अश्वनी श्रीवास्तव, पुनीत कालरा, महेश नारायण, चंद्रकान्त गुप्ता, हेमन्त बिन्दल, अभिषेक अग्रवाल, चंद्रकान्त गुप्ता, दीपक आतवानी, मनोज गुप्ता, नरेन्द्र पंजवानी, जगदीश राठी, सुशील अग्रवाल, हरिमोहन गुप्ता, संजय गुप्ता, हरिओम सिंघल, नितिन अग्रवाल, राजेश श्रीवास्तव आदि रहे।


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