क्या कोई इंटरनेट पर लगातार आपका पीछा कर रहा है, तो आप हो रहे हैं साइबर क्राइम का शिकार

एक्सपर्ट से जानिए कि क्या है

साइबर अपराध और कैसे बचें 




 सोनी त्रिपाठी 
आज
पूरी दुनिया डिजिटल हो रही है। यह आधुनिकता की सबसे बड़ी जरूरत है। आप डिजिटल हैं तो दुनिया के साथ हैं वरना दुनिया से बहुत पीछे हैं। हालांकि इस चीज का दूसरा पहलू यह भी है कि आधुनिकता की दौड़ में साइबर अपराध भी रोजाना बढ़ रहे हैं। आए दिन किसी न किसी साइबर अपराध की खबर सामने आ ही जाती है। इंटरनेट द्वारा संचालित संचार माध्यमों द्वारा किए गए अपराध साइबर क्राइम के अंतर्गत आते हैं।
 आखिर क्या है साइबर अपराध और इससे कैसे बचें, कहां और कैसे शिकायत दर्ज करें, आखिर क्या है हमारे अधिकार ? इस तरह के तमाम प्रश्नों के बारे में आपको बता रही हैं आगरा की प्रमुख समाज सेवी, साइबर एक्सपर्ट और सोशल काउंसलर सोनी त्रिपाठी...
 सोनी त्रिपाठी कहती हैं कि साइबर अपराध विभिन्न रूपों में किए जाते हैं। ऐसे अपराध में साइबर जबरन वसूली, पहचान की चोरी, क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी, कंप्यूटर से व्यक्तिगत डेटा हैक करना, फ़िशिंग, अवैध डाउनलोडिंग, साइबर स्टॉकिंग, वायरस प्रसार,सहित कई प्रकार की गतिविधियाँ शामिल हैं।

 फर्जी प्रोफाइल बनाना भी बड़ा अपराध

किसी की फर्जी प्रोफाइल बनाना आईपीसी की धारा 419 के तहत और आईटी एक्ट 2000 की धारा 66-डी के तहत दंडनीय अपराध है। फर्जी प्रोफाइल बनाने के अपराध में दोषी को तीन साल तक की सजा व जुर्माना हो सकता है। यदि इंटरनेट मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल के शिकार हैं, तो इसकी सूचना अपने संबंधित पुलिस स्टेशन को दें। इस अपराध के मामले में पहली बार किये गए अपराध के लिए 3 वर्ष तक की सजा और जुर्माना अदा करना होगा तथा दूसरी बार अपराध करने के मामले में 5 वर्ष की सजा  तथा जुर्माना अदा करना पड़ेगा।

स्टॉकिंग

इंटरनेट पर किसी विशेष व्यक्ति का लगातार पीछा करने का मतलब है साइबर स्टॉकिंग। इस गतिविधि में उत्पीड़न या धमकी भरा व्यवहार भी शामिल है। स्टॉकिंग करने वाला अपराधी, किसी व्यक्ति को बार-बार मैसेज भेजकर,  मिस कॉल  करके मानसिक रूप से प्रताड़ित करता है तो यह बिल्कुल गलत है। ऐसा करना संज्ञेय अपराध है। साइबर स्टॉकिंग में इंटरनेट या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का उपयोग होता है, जिसके द्वारा ई-मेल या एसएमएस के माध्यम से उस व्यक्ति को मानसिक उत्पीड़न करना भी साइबर स्टॉकिंग में आता है।
एक साइबरस्टॉकर पूरी तरह से इंटरनेट द्वारा दी गई सुविधाओं के माध्यम से करता है। विशेषकर महिलाओं को शिकार बनाते हैं। साइबरस्टॉकिंग एक गंभीर अपराध है और भारत में इसके अनगिनत मामले हैं। कई बार तो ऐसे मामलों में विभिन्न कारणों से रिपोर्ट भी  दर्ज नहीं हो पाती है। इसका कारण यह नहीं है कि रिपोर्ट दर्ज कराने का आपको कोई अधिकार नहीं है या आपके लिए कानून नहीं बने। दरअसल यह सब होता है साइबर क्राइम कानून की जानकारी के अभाव में।

साइबर बुलिंग का शिकार होती महिलाएं

साइबर बुलिंग यानी गंदी भाषा, तस्वीरों या धमकियों से इंटरनेट पर तंग करना। ऐसे क्राइम के मामले हर दिन बढ़ रहे हैं। युवा लड़कियों को इंटरनेट पर बुली किया जाता है, उनके कपड़ों और बदन को लेकर अभद्र टिप्पटियां की जाती है।

साइबर क्राइम का क्षेत्राधिकार है 
व्यापक, कहीं भी दर्ज कराएं रिपोर्ट

साइबर अपराध का क्षेत्राधिकार सीमित नहीं है क्योंकि ये अपराध बिना किसी बाधा के किए जाते हैं। इसलिए, आप किसी भी शहर की साइबर क्राइम इकाइयों में अपनी रिपोर्ट दर्ज करा सकते हैं। चाहे वह किसी भी शहर की हो, जहां भी वह स्थित हो। साइबर स्टॉकिंग कई अलग-अलग रूप ले सकता है लेकिन व्यापक अर्थों में यह  उत्पीड़न है।

साइबर सेल

साइबर क्राइम के पीड़ितों की समस्याओं के समाधान के लिए साइबर सेल की स्थापना की गई है। ये सेल आपराधिक जांच विभाग के एक भाग के रूप में कार्य करते हैं और विशेष रूप से इंटरनेट से संबंधित आपराधिक गतिविधि से निपटते हैं। यदि आप के आसपास  साइबर सेल उपलब्ध नहीं हैं, तो आप अपने स्थानीय पुलिस स्टेशन में भी प्राथमिकी दर्ज कर सकते हैं। आप अपने शहर के आयुक्त या न्यायिक मजिस्ट्रेट से भी संपर्क कर सकते हैं। यदि किसी भी कारण से आप एफआईआर दर्ज करने में असमर्थ हैं, तो कोई भी पुलिस स्टेशन अपने क्षेत्राधिकार के बावजूद, एफआईआर दर्ज करने के लिए बाध्य है।
पुलिस भारत में एकमात्र कानून प्रवर्तन एजेंसी है। जब महिला पीड़ितों के साथ व्यवहार करने की बात आती है तब पुलिस का व्यवहार सहयोगात्मक नहीं होता है। इसी असहयोग के कारण एवं अतिरिक्त शोषण का शिकार होने के डर से, उन्हें इस घटना की रिपोर्ट करने में संकोच होता हैं। थाने जाने से महिलाएं परहेज करती हैं। परिणामस्वरूप, महिलाओं के खिलाफ होने वाले ऐसे अपराध  दिनों दिन बढ़ते जा रहे हैं। साइबर अपराधियों के  हौसले बुलंद होते जा रहे हैं l वर्तमान परिस्थितियों में साइबर क्राइम के उचित समाधान के लिए पुलिस का पारंगत होना एवं सहयोग अपेक्षणीय है।

 टोल फ्री नंबर

यदि आप साइबर क्राइम  के शिकार हुए हैं तो आप टोल फ्री नंबर 155260 और विशेषकर महिलाएं 1090 पर  शिकायत कर सकती हैं l अब साइबर अपराध व शातिरों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए शिकंजा कसने के लिए शासन स्तर पर टोल-फ्री नंबर  जारी किया गया है। इस हेल्प लाइन नंबर पर काल कर फौरन साइबर अपराध की जानकारी दे सकते हैं।
भारतीय दंड संहिता की धारा 354 डी जो कि आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम 2013 द्वारा जोड़ा गया था, विशेष रूप से पीछा करने का कार्य बताता है l 


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