| फोटो अखिलेश यादव के टि्वटर हैंडल से साभार |
मुकेश उपाध्याय (न्यूज़ स्ट्रोक )
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं । जो खबरें निकल कर आ रही है, उनके मुताबिक जनवरी के महीने में चुनाव की तारीख घोषित हो सकती हैं। पीएम मोदी और सीएम योगी की जोड़ी जिस तरह यूपी में सक्रिय है, इससे कयासों को बल मिल रहा है। यह बात रही सत्ताधारी दल की। अब विपक्ष की ओर से दमदार तस्वीर सामने आई है, जिसमें साफ है कि विपक्षी राजनीति के दो बड़े नेता पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल यादव अब साथ-साथ आ गए हैं। निसंदेह यह खबर काफी बड़ी है।
समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को अपने चाचा और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव से लंबे इंतजार के बाद मुलाकात की। आधे घंटे से अधिक की इस मुलाकात में दोनों दलों के बीच गठबंधन को लेकर सहमति बन गई है। पांच साल पहले दोनों के बीच दूरियां इतनी बढ़ गई थीं कि उनकी राहें अलग हो गईं। अब फिर चुनाव की बेला पर मुलायम परिवार एक हो गया है।
शिवपाल यादव के लखनऊ के गौतमपल्ली इलाके स्थित आवास पर अखिलेश यादव ने मुलाकात की। करीब 45 मिनट की मुलाकात के बाद अखिलेश यादव बाहर निकले और बिना मीडिया से बात किए अपनी गाड़ी में बैठकर रवाना हो गए। इसके बाद चर्चा का माहौल गर्म हो गया। अखिलेश के मीडिया से बात न करने से कुछ संशय हुआ। लेकिन कुछ ही क्षणों में यह संशय दूर हो गया जब अखिलेश ने ट्वीट कर गठबंधन की बात तय होने का ए ऐलान कर दिया।
अखिलेश यादव ने इस अहम बैठक के बाद शिवपाल यादव के साथ फोटो सहित ट्वीट कर कहा कि प्रसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जी से मुलाक़ात हुई और गठबंधन की बात तय हुई। क्षेत्रीय दलों को साथ लेने की नीति सपा को निरंतर मजबूत कर रही है और सपा और अन्य सहयोगियों को ऐतिहासिक जीत की ओर ले जा रही है।
खबरों के मुताबिक अखिलेश यादव ने शिवपाल यादव के पांव छुए तो भावुक हुए शिवपाल यादव ने उन्हें गले लगाया। अखिलेश यादव की मुलाकात पूरे परिवार के साथ हुई। शिवपाल यादव और उनकी पत्नी यानि अखिलेश यादव की चाची भी मौजूद रहीं।
गौरतलब है कि शिवपाल यादव मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई हैं। उनकी गिनती सपा के बड़े नेताओं में थी। साल 2007 में मायावती के शासन में शिवपाल यादव विपक्ष के नेता भी रहे हैं। हालांकि, 2017 विधानसभा चुनाव के दौरान अखिलेश यादव औऱ शिवपाल यादव में खटास बढ़ गई थी। इसके बाद शिवपाल यादव ने नई पार्टी बनाने का ऐलान किया था। अक्टूबर 2018 में शिवपाल यादव ने प्रगतिशील समाजवादी मोर्चा बनाने का ऐलान किया। शिवपाल यादव ने 2019 लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में अपनी पार्टी से प्रत्याशी भी उतारे थे। इसके चलते सपा को कई सीटों पर नुकसान भी उठाना पड़ा था।
अखिलेश और शिवपाल यादव के मिलने से सपा को आगरा, फिरोजाबाद, हाथरस, मैनपुरी, इटावा सहित अन्य कई जिलों में ताकत मिलेगी। जो वोट सपा और प्रसपा के बीच बढ़ते थे वह अब सपा की ताकत बन जाएंगे। शिवपाल यादव को भी इससे काफी फायदा होगा। शिवपाल यादव की कार्यकर्ताओं में नीचे तक पैठ है। आज भी सपा के हजारों कार्यकर्ता शिवपाल यादव का सम्मान करते हैं। ऐसे में जहां शिवपाल यादव की पार्टी अपने प्रत्याशी उतारेगी, वहां उसे समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं का भरपूर सहयोग मिलेगा।
इसमें कोई दो राय नहीं कि अखिलेश यादव और शिवपाल यादव का गठबंधन भाजपा के सामने कड़ी चुनौती पेश करेगा।
शिवपाल-अखिलेश की मुलाकात तीज-त्योहारों और शादी समारोह में हो रही थी लेकिन राजनीतिक मुलाकात का प्रदेश की जनता को लंबे से समय से इंतजार था। यही नहीं चुनाव से पहले हुई इस मुलाकात का सत्ता में बैठी भाजपा सहित अन्य पार्टियां भी नजर रखे हुई थीं।
अखिलेश और शिवपाल के मिलन में दोनों का ही फायदा होता दिखाई देता है। ये इनकी मजबूरी भी है। क्योंकि शिवपाल के अलग होने से अखिलेश जहां कमजोर हुए, वहीं सपा छोड़ने के बाद शिवपाल भी अकेले पड़ गए थे। यही वजह है की चाचा भतीजे के रुख में नरमी आई है।
अखिलेश और शिवपाल यादव के मिलने से सपा को आगरा, फिरोजाबाद, हाथरस, मैनपुरी, इटावा सहित अन्य कई जिलों में ताकत मिलेगी। जो वोट सपा और प्रसपा के बीच बढ़ते थे वह अब सपा की ताकत बन जाएंगे। शिवपाल यादव को भी इससे काफी फायदा होगा। शिवपाल यादव की कार्यकर्ताओं में नीचे तक पैठ है। आज भी सपा के हजारों कार्यकर्ता शिवपाल यादव का सम्मान करते हैं। ऐसे में जहां शिवपाल यादव की पार्टी अपने प्रत्याशी उतारेगी, वहां उसे समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं का भरपूर सहयोग मिलेगा।
इसमें कोई दो राय नहीं कि अखिलेश यादव और शिवपाल यादव का गठबंधन भाजपा के सामने कड़ी चुनौती पेश करेगा।
शिवपाल-अखिलेश की मुलाकात तीज-त्योहारों और शादी समारोह में हो रही थी लेकिन राजनीतिक मुलाकात का प्रदेश की जनता को लंबे से समय से इंतजार था। यही नहीं चुनाव से पहले हुई इस मुलाकात का सत्ता में बैठी भाजपा सहित अन्य पार्टियां भी नजर रखे हुई थीं।
अखिलेश और शिवपाल के मिलन में दोनों का ही फायदा होता दिखाई देता है। ये इनकी मजबूरी भी है। क्योंकि शिवपाल के अलग होने से अखिलेश जहां कमजोर हुए, वहीं सपा छोड़ने के बाद शिवपाल भी अकेले पड़ गए थे। यही वजह है की चाचा भतीजे के रुख में नरमी आई है।

0 Comments