जीवात्मा का परमात्मा से मिलन ही है महारास




-लंगड़े की चौकी हनुमान मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन

न्यूज़ स्ट्रोक
आगरा, 15 अप्रैल। लंगड़े की हनुमान मंदिर में हनुमान जन्मोत्सव के तहत जारी श्रीमद्भागवत कथा में शुक्रवार को श्रीकृष्ण लीलाओं की कथाओं का रोचक वर्णन हुआ। कथा में कंस वध होते ही श्रीकृष्ण के जयकारे गूंज उठे। 
व्यास गद्दी से आचार्य हिमांशु धर शास्त्री ने बताया कि श्रीकृष्ण की लीलाओं को समझना आसान नहीं हैं। उसमें गूढ़ रहस्य छिपे रहते हैं। उन्होंने कहा कि महारास श्रीकृष्ण की लीलाओं का चरम है। जीवात्मा का परमात्मा से मिलन ही महारास कहलाता है। गोपियों का श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम शारीरिक नहीं, आत्माओं का मिलन है। श्रीकृष्ण परमात्मा हैं। वह सर्वस्व हैं। अविनाशी हैं और युग पुरुष हैं। अन्य कथाओं में आचार्य हिमांशु धर ने कहा कि श्रीकृष्ण ने एक दिन घर के दूध दही के मटके फोड़ दिए। यह देख मां ने कन्हैया को ऊखल से बांध दिया तो भगवान का नाम दामोदर पड़ गया। कृष्ण ने एक दिन माटी खा ली तो सखाओं ने मैया यशोदा से शिकायत की तब कृष्ण ने अपने मुख में मैया को सारा ब्रह्मांड दिखा दिया।
ब्रह्मा का भ्रम को दूर किया। ब्रह्माजी कृष्ण को साधारण बालक समझ रहे थे, परीक्षार्थ भगवान के बछड़े एवं सखाओं को चुराकर ब्रह्मलोक ले गए। तब भगवान ने अपने शरीर से ही रूप रंग आकृति में उतने ही बछड़े एवं बालक प्रकट कर ब्रह्मा को भी विस्मित कर दिया था। कथा के दौरान बड़ी संख्या में भक्तजन और मंदिर के महंत गोविंद गुरु, गोपाल गुरु, गोपी गुरु, राम उपाध्याय आदि मौजूद रहे।


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